Category: व्यूज

श्रीकांत जी की एक कविता

द न्यूज़ यूनिवर्स श्रीकांत जी की अंतर्मन को छू लेने वाली कविता मेरे दुःख हाँ मेरे दुख मेरे अपने हैं कौन बांट लेगा इन्हें औऱ क्यों बांटू मैं अपने निजत्व को यदि मैं बांटू भी तो क्या संवेदनाओं के खाद, पानी से और नहीं बढ़ जाएंगे और नहीं सतायेंगे मेरे

अच्छे दिन

द न्यूज़ यूनिवर्स  श्रीकांत जी की कविताओं से आम आदमी की पीड़ा मुखरित होती है  और राजनीतिक एवम सामाजिक परिदृश्य के यथार्थ भी । प्रस्तुत है उनकी एक रचना     अच्छे दिन अब कभी नहीं आयेंगे क्योंकि अच्छे दिन थे एक मिथ एक जुमला जो बुने गये थे एक

  द न्यूज़ यूनिवर्स  झाँसी जनपद के कसबा मोंठ निवासी रामप्रकाश सोनी यूं तो पेशे से दस्ताबेज लेखक हैं ,सब रजिस्ट्रार कार्यालय में प्रतिदिन बैनामे व अन्य दस्तावेज पंजीकृत करते हैं ,लेकिन उनके अंतर्मन में गहरे बैठा कवि जब तब दुनियाभर की छटपटाहटों को लेकर उन्हें कविताएं लिखने को मजबूर

राजनैतिक लाभ के लिये लोकतंत्र को भीड़तंत्र में बदलने का प्रयास करते जनप्रतिनिधि

द न्यूज़ यूनिवर्स डेस्क  विचार / अभिव्यक्ति अभिनव गुप्ता ये तस्वीर भारत के लोकतंत्र के भीड़तंत्र बनने की कहानी कहती है। हम अक्सर लोकतंत्र की परिभाषा यूं समझ बैठते हैं कि बहुसंख्या में जो लोग चाहेंगे वही होगा, मोटे तौर पर ऐसा सही भी है पर उसमें एक क्लॉज़ है

कथाक्रम , अभिनव की कहानी ” कप्तान”

द न्यूज़ यूनिवर्स झाँसी में जन्मे युवा साहित्यकार की रचनाएं उनके साथियों ,परिचितों व परिजनों को सुखद अनुभूति करतीं रहतीं हैं , उनकी लेखनी से उनकी वैचारिक ऊंचाई व सामाजिक सरोकारों के प्रति जुड़ाव परिलक्षित होता है ।  अभिनव रचित एक कहानी प्रस्तुत है ,कृपया अपनी प्रतिक्रिया जरूर दीजिये “कप्तान“

गङ्गा दशहरा व गायत्री माता के अवतरण दिवस पर श्री पंचमुखी महादेव मंदिर पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन

द  न्यूज़ यूनिवर्स डेस्क , 12 जून बुधवार मऊरानीपुर ( झाँसी ) गङ्गदशहरा पर्व पर नगर व क्षेत्र के मन्दिरों में धार्मिक कार्यक्रमों की धूम रही ।मन्दिरों की नगरी मऊरानीपुर में बिभिन्न मन्दिरों में विशेष पूजा अर्चना व धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए । गङ्गा दशहरा पर गायत्री माता के साधकों

भूखे मन की पीर लिखूं या नवगीत लिखूं – श्रीकांत

द न्यूज़ यूनिवर्स डेस्क – झाँसी निवासी श्रीकांत गुप्ता प्रतिष्ठित ज्वेलर हैं ,लेकिन उनपर माँ शारदा की कृपा भी उतनी ही है जितनी माँ लक्ष्मी की । उनकी कविताओं से आम जन की पीड़ा मुखरित होती है । मन को छू लेने वाली  श्रीकांत जी की  कविता – –  

मौन का भी अपना स्वर है — श्रीकांत

श्रीकांत जी की एक सशक्त रचना     मौन का भी अपना स्वर है मौन मौन से ज्यादा मुखर है मौन की है अपनी भाषा मौन बजाए ढोल ताशा मौन मेले में अकेला मौन सा ना कोई मेला मौन मौन की अपनी बोली मौन सी ना कोई गोली मौन सी

श्रीकांत की कलम ,

द न्यूज़ यूनिवर्स डेस्क — झाँसी निवासी श्रीकांत जी की एक कविता , अपनी प्रतिक्रिया जरूर दीजिये   शब्द बेचता हूँ स्वप्न भी दिखाता हूँ तुम्हारे भाग्य का भी विधाता हूँ तुम लड़ो तुम कटो तुम मरो कभी धर्म के नाम पर कभी जात के नाम पर कभी दल के 

परीक्षार्थियों से परीक्षा परिणाम के बारे में पूँछने वालो , ये हमदर्दी है या वेदर्दी

द न्यूज़ यूनिवर्स डेस्क व्यूज –रिजल्ट के इस सीजन में आप राह चलते किसी बच्चे से उसका रिजल्ट पूँछ बैठेंगे और तपाक से अपने किसी फलाने रिश्तेदार के बच्चे का रिजल्ट भी उसे बतायेंगे के अगले के तुमसे ज्यादा नंबर आये हैं। भले ही आपको उस फलाने रिश्तेदार से कोई