नई शिक्षा नीति पर बी यू में हुई कार्यशाला

द न्यूज यूनिवर्स

झाँसी

16 जनवरी

नई शिक्षा नीति देश की वर्तमान आवश्यकता के अनुरूप: कुलपति प्रो.वैशम्पायन  
बी.यू. में नई शिक्षा नीति पर एक दिवसीय कार्यशाला का हुआ आयोजन
झाँसी। नई शिक्षा नीति देश की वर्तमान आवश्यकता के अनुरूप ही बनाइ्र गई है तथा देश की शिक्षा क्षेत्र की सभी समस्याओं को हल करने में सक्षम होगी। यह विचार आज बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय के कुलपतिप्रो.जे.वी.वैशम्पायन ने व्यक्त किये। कुलपति प्रो.वैशम्पायन आज बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय परिसर के गांधी सभागार में विश्वविद्यालय के इंटरनल क्वालिटी एश्योरेंस सेल( आई.क्यू.ए.सी.) द्वारा बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय के सम्बद्धित राजकीय, अनुदानित एवं स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों के प्रबन्धकों एवं प्राचार्यो को राष्ट्रीय शिक्षा नीति एवं नैक मूल्यांकन के महत्व के विषय में जानकारी देने हेतु आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन के अवसर पर उपस्थित श्रोताओं को सम्बोधित कर रहे थे। कुलपति ने कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 21वीं सदी के भारत की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये भारतीय शिक्षा प्रणाली में बदलाव हेतु जिस नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को मंजूरी दी है, अगर उसका क्रियान्वयन सही तरीके से होता है तो यह नई प्रणाली भारत को विश्व के अग्रणी देशों के समकक्ष ले आएगी।

प्रो.वैशम्पायन ने कहा कि नई शिक्षा नीति का उद्देश्य ग्रॉस एनरोलमेंट अनुपात में वृद्धि के साथ साथ सभी छात्रों को उच्च शिक्षा प्रदान करना है। नई नीति के अंतर्गत शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, थ्री-डी मशीन, डेटा-विश्लेषण, जैवप्रौद्योगिकी आदि क्षेत्रों के समावेश से अत्याधुनिक क्षेत्रों में भी कुशल पेशेवर तैयार होंगे साथ ही युवाओं की रोजगार क्षमता में वृद्धि होगी।  उन्होंने कहा कि  नई शिक्षा नीति के अन्तर्गत भाषाई विविधता के संरक्षण का प्रयास किया गया हैं, जिसके अन्तर्गत किसी भी बच्चे को उसकी प्राथमिक शिक्षा उसकी मातृभाषा  अथवा स्थानीय भाषा मे दिये जाने का प्रावधान किया गया है। कुलपति ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने, नवाचार तथा अनुसंधान को बढावा देने के लिए ही नई शिक्षा नीति की नितान्त आवश्यकता थी। प्रो.वैशम्पायन ने कहा कि यद्यपि नई शिक्षा नीति के समक्ष काफी चुनौतिया हैं, परन्तु आशा है कि यह अपने उद्दश्यों को प्राप्त कर सकेगी।
इस अवसर पर मुख्य वक्ता के.एम.गवर्नमेंट गल्र्स कॉलेज के प्रो.दिनेश चंद्र शर्मा द्वारा नई शिक्षा नीति के प्रमुख प्रावधानों पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला गया। उन्होनं उपस्थित महाविद्यालयों के प्रबन्धकों तथा प्राचार्यो का आव्हान किया कि वे शिक्षा एवं शिक्षण की गुणवत्ता में उन्नयन हेतु नैक मूल्यांकन अवश्य करवाये। उन्होंने नैक मूल्यंाकन से सम्बन्धित विभिन्न प्रक्रियाओं के बारे में भी चर्चा की।
बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय में आई.क्यू.ए.सी. के निदेशक प्रो.सुनील काबिया ने अतिथियों को स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। प्रो. काबिया ने उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए नैक की महत्ता के बारे में विस्तापूर्वक प्रकाश डाला तथा उपस्थित महाविद्यालयां के प्रबन्धकों तथा प्राचार्यो को आश्वस्त किया कि विश्वविद्यालय के आई.क्यू.ए.सी. प्रकोष्ठ द्वारा उन्हे इस सम्बन्ध में हरसम्भव निर्देशन एवं सहायता प्रदान की जायेगी। क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ.संध्या रानी तथा बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय के कुलसचिव नारायण प्रसाद ने भी इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त किये।
आज के कार्यक्रम का शुभारम्भ मंचासीन अतिथियों के द्वारा मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलन, पुष्पार्चन तथा माल्यार्पण के हुआ। कार्यक्रम का संचालन बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय में आई.क्यू.ए.सी. प्रकोष्ठ की समन्वयक डा.यशोधरा शर्मा ने किया। आमंत्रित अतिथियेां को आभार भी डा.यशोधरा शर्मा ने ज्ञापित किया। कार्यशाला में 125 से अधिक राजकीय, अनुदानित एवं स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों के प्रबंधकों एवं प्राचार्यों ने प्रतिभाग लिया।
————–