सफर करते-करते मुरझा गए मजदूरों के चेहरे

द न्यूज यूनिवर्स

झाँसी

20 मई



सफर करते-करते मुरझा गए मजदूरों के चेहरे,घर की दहलीज चूमने की ललक दे रही कदमों को रफ्तार
झाँसी। यूपी की हुकूमत का ऐलान है कि मजदूरों को पैदल घर नहीं जाने देंगे। तभी तो हाईवे पर वर्दी का पहरा है। अफसरों की टीम भ्रमण पर है। सरकार की कोशिशें लाख हैं पर मजदूरों के चेहरे अभी भी मुरझाए हुए हैं। हरियाणा, और दिल्ली से लौटने वाले मजदूरों की आंखे लाल हैं और दिलों में घरों को वापस लौटने का तूफान है।
यह किसी रुपहले पर्दे की कहानी नहीं है, बल्कि स्याह सच है। बुधवार को रक्सा बार्डर पर दिखे कामगारों की जिंदगी का सच है। दिनभर पैदल और गैर अनुमन्य वाहनों से कामगार घर की ओर निकलते गए। बस्ती (अमोहरा) के रामविशाल, गौंडा के विकास और इसी जिले के पनमाली निवासी अंशुमान हरियाणा के झज्जर जिले से चलते हुए दोपहर तक चेक पोस्ट पहुंच पाए। तीन मार्च को तीनों साथ में गए थे। लॉकडाउन में इतने दिन का समय बड़ा मुश्किल से कटा। घर जा रहे हैं और अब गांव में ही रहेंगे। बोले, सुबह के छह बजे गुरुग्राम से तीन किमी आगे ट्रक मिला। उससे गाजियाबाद आए। उसके बाद पैदल निकले हैं। बताया कि बस से घर जाने के लिए सरपंच के कहने पर तीस-तीस रुपए जमा कराकर ऑनलाइन पंजीकरण भी कराया था। मगर बस की सुविधा नहीं मिल पाई तो पैदल चल पड़े। अब गांव में रहकर ही मजदूरी करेंगे। शहर में काम करने नहीं जाएंगे। उधर, धूप में पैदल चलकर थके हारे मजदूरों का हाईवे पर ऐसे ही आगे बढऩा यूपी के मुख्यमंत्री के आदेश और पुलिस प्रशासन के दावे की बड़ी तौहीन है।


अलबत्ता हाईवे पर इस दौरान रोडवेज बस से गोंडा जिले के मसकनवां निवासी घनश्याम दास, संतोष वर्मा, सुनील सहित 44 यात्री निकले। सभी जम्मू की एल्युमिनियम कंपनी में काम करते हैं। हरियाणा राज्य के पानीपत से बड़ौत डिपो की बस से आजमगढ़ की मुकेश कुमार सहित अंबेडकर नगर जाती मिलीं। हालांकि पुलिस ने बस में सवारों को खाना दिया। पैदल चलकर चेक पोस्ट तक पहुंचे अशोक कुमार , धर्मेंद्र, प्रमोद, सूरजपाल और रामदुलारे का मुरझाया चेहरा यहां के जवानों को परेशान कर गया। इन लोगों को प्रतापगढ़ जाना था।