प्रवासी श्रमिकों को कुशलतापूर्वक गंतव्य तक पहुचाना प्राथमिकता – डीएम ; अन्य समाचार

द न्यूज यूनिवर्स

झाँसी

20 मई


प्रवासी श्रमिक को सकुशल गंतव्य स्थान तक पहुंचाने की हैं प्राथमिकता: डीएम
आपसी तालमेल के साथ किया जाए कार्य
झाँसी। रेल प्रशासन ट्रेन से उतरने वाले प्रवासी श्रमिकों को यात्री शेड/ स्टेशन पर रोकना सुनिश्चित करें, ताकि स्टेशन के बाहर भीड़ भाड़ ना हो और उन्हें बसों के माध्यम से सकुशल गंतव्य तक पहुंचाया जा सके। इस कार्य में जीआरपी/ आरपीएफ भी पुलिस का सहयोग करें। आपसी तालमेल के साथ यदि कार्य किया जाए तो सफलता अधिक मिलेगी और श्रमिक भी बड़ी सहजता से अपने घर पहुंच सकेंगे।
 यह बात जिलाधिकारी आन्द्रा वामसी ने विकास भवन सभागार में रेलवे प्रशासन के साथ एक सामंजस्य स्थापित करने हेतु बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही। उन्होंने कहा कि हमारी प्राथमिकता प्रवासी श्रमिक सकुशल अपने गंतव्य तक पहुंचाने की है।

प्रति ट्रेन से जा रहे 1200 प्रवासी श्रमिक
उन्होंने कहा कि विगत दिनों में श्रमिक स्पेशल के नाम से जनपद झाँसी में गोंडा, बस्ती, गोरखपुर के लिए लगभग 15 ट्रेनें जा चुकी हैं जिसमें  प्रति ट्रेन के हिसाब से 1200 सौ प्रवासी श्रमिकों को भेज रहे हैं, इसके साथ-साथ झाँसी में बहुत सारी जगह से देश के हर कोने से श्रमिक ट्रेन हो या जनपद से जुड़ी चार राजधानी ट्रेनों का भी आगमन हो रहा है। राजधानी ट्रेन में भी श्रमिक लोग टिकट खरीदकर आ रहे हैं और श्रमिक स्पेशल से भी लोग आ रहे हैं, लेकिन उनका गंतव्य स्थान झाँसी नहीं है। झाँसी के अलावा अन्य जनपद या अन्य प्रदेश भी हैं जैसे राजस्थान के लोग भी झाँसी उतर रहे हैं और मध्य प्रदेश के लोग भी झाँसी उतर रहे हैं।

अब मजदूरों को ट्रेन के माध्यम से भेजा जाएगा
जिलाधिकारी आन्द्रा वामसी ने कहा कि प्रतिदिन झाँसी से जाने वाली ट्रेन है उनका समय निर्धारित करते हुए रक्सा बॉर्डर में जो भी श्रमिक आ रहे हैं उन सभी को ट्रेन के माध्यम से भेजने की व्यवस्था की गई है। जो श्रमिक ट्रेन आ रही हैं और प्रवासी श्रमिक उतर रहे हैं उनको यथा सम्मान बैठाए जाने व उन्हें गंतव्य तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है।

श्रमिकों को ले जाने के लिए छह ट्रेन निर्धारित
उन्होंने बताया कि जाने वाली ट्रेन जो प्रात 11:00 बजे, दोपहर 02:00, बजे शाम 08:00 बजे, और रात्रि 01:30 बजे रवाना होगी यह प्राथमिकता वाली हैं ।इसके अतिरिक्त शाम 05:00 बजे, रात्रि 11:00 बजे कुल 6 ट्रेन झाँसी से श्रमिकों को  लेकर जाने के लिए निर्धारित हैं। उन्होंने श्रमिकों को स्टेशन  से गंतव्य तक ले जाने हेतु 40 बसों को स्टैण्ड वाई पर खड़े रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह कोई समस्या ना होने पाए यह अवश्य सुनिश्चित किया जाए। बैठक में उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश जाने वाले श्रमिकों को मध्य प्रदेश की सीमा पर ही छोड़ दिया जाए, यह अवश्य सुनिश्चित करें।
इस मौके पर सीडीओ निखिल टीकाराम फुंडे, एडीआरएम अमित सेंगर, वरिष्ठ मंडल प्रबंधक शशिकांत त्रिपाठी, एसपी सिटी राहुल श्रीवास्तव, एसडीम सदर संजीव कुमार मौर्य, नगर मजिस्ट्रेट सलिल पटेल, सीओ सिटी संग्राम सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

प्रवासियों को झाँसी से चलाई जा रही श्रमिक विशेष ट्रेनें
गोरखपुर की ओर जाने वाले प्रवासियों के लिए आज झाँसी से तीन श्रमिक विशेष ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। इसके अलावा एक श्रमिक स्पेशल झाँसी से वाराणसी को और दो ट्रेन ललितपुर से गोरखपुर के मध्य संचालित की जा रही है। गोरखपुर जाने वाली श्रमिक स्पेशल मार्ग गोंडा और बस्ती स्टेशनों पर तथा वाराणसी जाने वाली स्पेशल रेलगाड़ी कानपुर, फतेहपुर तथा प्रयागराज स्टेशन पर भी  ठहरेगी और इन जगहों पर पूर्व निर्धारित यात्रियों को उतरने की अनुमति होगी। श्रमिक विशेष ट्रेनों का परिचालन प्रतिदिन बढ़ाया जा रहा है, रेलवे ने अब देश में रेल नेटवर्क से जुड़े सभी जिलों से श्रमिक विशेष ट्रेनें चलाने का निर्णय लिया है। संशोधित योजना के तहत, संबंधित जिला कलेक्टर फंसे हुए मजदूरों और गंतव्य की एक सूची तैयार करेंगे, और इसे राज्य नोडल अधिकारी के माध्यम से रेलवे को प्रेषित किया जाएगा।

मंडल के रेलवे स्टेशनों पर 15 हजार यात्रियों का आगमन
इसके साथ ही बड़ी संख्या में श्रमिक स्पेशल गाड़ियों से मंडल के विभिन्न स्टेशनों जैसे झाँसी, ग्वालियर,उरई, छतरपुर, टीकमगढ़ आदि पर पहुंच रहे हैं। आज 20 मई को लगभग 15,000 से अधिक यात्रियों ने मंडल के स्टेशनों पर आवागमन किया। सभी यात्रियों की थर्मल स्कैनिंग की व्यवस्था की जा रही है। इसके साथ – साथ सामाजिक दूरी एवं मास्क की सुनिश्चितता भी की गई है जिससे कोविड-19 के संक्रमण को रोका जा सके। नियमानुसार श्रमिक यात्रियों हेतु खाने – पीने की व्यवस्था की जा रही हैं। पासिंग रेलगाड़ियों में भी खान – पीन, स्नैक्स एवं पानी नियमानुसार उपलब्ध कराया जा रहा है।


मिलकर लड़ेंगे तभी कोरोना से जीतेंगे, गंभीर संकट में भी राजनीति होना शर्मनाक
झाँसी। ये महामारी है। इसका न कोई अपना है और न पराया। यहां कोई दोस्ती, रिश्तेदारी और सिफारिश भी नहीं चलती। शर्मनाक है कि गंभीर संकट में भी राजनीति हो रही है। पार्टी ओहदेदारों का मानों यही काम है। उनसे क्या शिकायत करनी, लेकिन सरकारी तंत्र में भी जिम्मेदार मौके का फायदा उठाने में लगे हैं। राजनीति चरम पर है। पुराने हिसाब चुकता हो रहे हैं। एक-दूसरे की घेराबंदी चल रही है। लोग मानने को तैयार नहीं हैं कि यह समय संकट का है। लड़ाई लंबी है, जिसे मिलकर लड़कर ही जीता जा सकता है। याद दिला दूं, हाल ही में जिम्मेदार लोगों की बैठक हुई थी, जिसमें प्रशासन, पुलिस, अस्पताल, स्वास्थ्य विभाग, निगम के बीच समन्वय और सहयोग पर अंगुली उठी। अब इन जिम्मेदारों से कोई पूछे कि खुद उनमें आपस में कितना समन्वय है और सरकारी सिस्टम के साथ वे कहां खड़े दिखाई दिए?

आखिर किसने बढ़ाया कोरोना का पारा
कोरोना हद में था। झाँसी में फैलने से डर रहा था। अचानक मौका मिला और उसने बाजी मार ली, 120 लोगों को अपनी गिरफ्त में ले लिया, 4 के प्राण हर लिए। तीन स्थानों का हॉटस्पॉट है। जिम्मेदार जनता को बताया जा रहा है? लेकिन, कुछ सवाल इशारा दूसरी ओर कर रहे हैं। सब्जी मंडी में बेकाबू हालात पर चेताने के बाद भी विलंब का जिम्मेदार कौन है? श्रमिकों को 1000 रुपये और जनधन खातों में 500 रुपये आए। खाते से पैसा निकालना और राशन की दुकान पर लाइन में लगना गरीबों की मजबूरी थी? लेकिन, वहां व्यवस्था किसे बनानी थी? शराब की दुकानें खोली, वहां दूरी किसे बनवानी थी? सिस्टम को यह सोचना होगा। भला हो सरकार का कि वह जरूरतमंदों पर मेहरबान है। खाने की नई थाली रोजाना त्यौहार का अहसास कराएगी। थाली में अब सब्जी-पूड़ी के साथ  चावल-दाल भी मिलेंगे।

ओ जाने वाले लौट के आना
कोरोना संकट में मजदूरों पर दोहरी मार है। हजारों किलोमीटर दूर मिला रोजगार तो गया ही, अब घर जाने में जान भी जा रही है, भूख तो अहम है ही। लॉकडाउन होते ही मजदूरों ने घर की यात्र शुरू कर दी थी, जिन्हें सुधार की उम्मीद थी वो रुके रहे। लेकिन, अब धैर्य नहीं बचा, अब हर कोई घर जाना चाहता है। मजदूर फिर सड़कों पर हैं। सरकार ने जब उन्हें घर पहुंचाने का फैसला लिया तब तक बहुत से बेकसूरों की भूख, प्यास से और दुर्घटना में जान चली गई। रेल और बसें पहले ही चल जातीं तो बात कुछ और होती। अभी कतार में हजारों हैं। हालात सामान्य नहीं। मजदूरों की मांग है कि रोजाना ट्रेन चलें, प्रत्येक मजदूर को घर पहुंचा दिया जाए। हालांकि जाने वालों को एक बार यह भी सोचना चाहिए कि उन्हें रोजगार के लिए लौटकर आना भी है, जो ज्यादा जरूरी है।

अच्छों के अच्छे होने का मतलब
कुछ अधिकारी ऐसे होते हैं जिनके होने से ही सबकुछ खुद-ब-खुद ठीक होने लगता है। मरीजों की जांच, समय से खाना और दवा मिलने लगती है। वार्ड साफ हो जाते हैं। जरूरतमंदों को अच्छा खाना मिलने लगता है। ऐसे अफसर एक आलराउंडर की तरह काम करते हैं। रोजाना सभी कोनों पर पहुंच जाते हैं। राजधानी में भी तमाम जिम्मेदारियां इन अधिकारियों के कंधों पर हैं, लेकिन 1857 की क्रांति का गवाह झाँसी आजकल संकट में है। शहर को फिर इनके आने का इंतजार है। बेशक, किसी भी शहर को ऐसे आलराउंडर अफसरों की जरूरत होती है, कोरोना संक्रमण के बीच संकट की इस घड़ी में झाँसी को तो कुछ ज्यादा ही है। ऐसे लोग भी शहर में हैं जिन्हें कभी फुरसत नहीं होती थी, वो अब घर में बैठकर जीवन का आकलन कर रहे हैं। अपने अपराधों की क्षमा याचना कर रहे हैं।