सात माह से बेतन न मिलने से त्रस्त आउटसोर्सिंग कर्मचारी रहे कई घण्टे हड़ताल पर

द न्यूज यूनिवर्स

झाँसी

25 मार्च

मलबा के आउटसोर्सिंग कर्मचारी तीन घंटे रहे हड़ताल पर
सात माह से नहीं मिला था वेतन, एक माह का वेतन देने पर मिली राहत
पूरा वेतन न मिलने से गुरुवार से फिर से जाएंगे हड़ताल पर
कोरोनावायरस के चलते प्रदेश लॉकडाउन, तीमारदारों को हो रही दिक्कत
झाँसी। मेडिकल कालेज में कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को सात माह से वेतन नहीं मिला है। इससे गुस्साएं से कोरोना वार्ड के आउटसोर्सिंग कर्मचारी बुधवार की सुबह हड़ताल पर चले गए, जिससे वहां की स्वास्थ्य व्यवस्था बिगड़ गई। सूचना पर प्रशासन व पुलिस के अफसर मौके पर पहुंचे। उन्होंने ठेकेदार से वार्ताकर तत्काल एक माह का वेतन दे दिया। इसके बाद लोगों ने राहत की सास ली। वहीं, पूरा वेतन न मिलने से उक्त कर्मचारी गुरुवार को फिर से हड़ताल पर चले जाएंगे।
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कालेज में कुछ कर्मचारी आउटसोर्सिंग पर कार्यरत है। इनमें स्टॉफ नर्स, वार्ड व्वाय व स्लीपर शामिल है। तीन स्टॉफ नर्स, वार्ड व्वाय व स्लीपर 200-200 शामिल है। उक्त कर्मचारियों को चार साल पहले ठेका पर रखा गया था। मेडिकल कालेज में न्यू बिल्डिंग बनाई गई है। इसी बिल्डिंग में कोरोना वायरस संक्रमण से संबंधित मरीजों को लाया जा रहा है। उक्त स्टॉफ इसी बिल्डिंग में कार्यरत है। बुधवार को लॉकडाउन हो गया। इसकी जानकारी मिलते ही आउटसोर्सिंग कर्मचारी इकट्ठा हो गए। करीब 11 बजे से सभी कर्मचारियों ने काम करना बंद कर दिया। कर्मचारियों का कहना है कि सात माह से वेतन नहीं दिया जा रहा है। लॉकडाउन से उनका परिवार भूखमरी की कगार पर हो गया है। आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का कहना है कि बिना मास्क के ड्यूटी करने पर मजबूर होना पड़ रहा है। वह खुद का पैसा देकर मास्क खरीद रहे हैं। कमोबेश, सभी नर्सिंग स्टाफ के पास अपने ऐसे की तर्क हैं। कहा- देश में लॉकडाउन है और हमारे पास पैसे नहीं है। ऐसे में घर का राशन कैसे रखें? मालूम हो कि कोरोना वायरस को लेकर मेडिकल कॉलेजों में टीमें गठित की गई हैं। झाँसी में अभी तक नर्सिंग स्टाफ को सैनिटाइजर नहीं दिए गए। वे अपने पैसों से खरीद कर मेडिकल कॉलेज लेकर जाते हैं। मेडिकल कॉलेज प्रशासन इन सब का कारण बजट का अभाव बताता है। इस मामले की जानकारी मिलते ही नगर मजिस्ट्रेट सलिल पटेल व सीओ सिटी संग्राम सिंह वहां पहुंचे। उन्होंने हड़ताल पर गए कर्मचारियों से वार्तालाप की। इसी दौरान नगर मजिस्ट्रेट एक कर्मचारी रामानंद को अपने साथ ले गए और सामने से सारे स्टॉफ को एक माह का वेतन डलवा दिया। वेतन मिलने पर उक्त स्टॉफ खुश हो गया। साथ ही यह कहा गया कि गुरुवार को पूरा वेतन नहीं दिया गया तो फिर से हड़ताल पर चले जाएंगे। कर्मचारियों का कहना है कि ठेकेदार पर सारा पैसा हैं। इसके बावजूद वह पैसा नहीं देना चाहता है।

जब सैलरी नहीं तो परिवार का ख्याल कैसे रखें?
नर्स रचना 7 महीने से गर्भवती हैं। उन्होंने कहा- मैं ऐसी अवस्था में भी ड्यूटी कर रही हूं। बीते 7 महीने से बजट का हवाला देते हुए हमें सैलरी नहीं दी गई। हम अपना और अपने परिवार का ख्याल कैसे रखें? वहीं, उमर फारूक का कहना है कि हम सब कोरोनावायरस की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। लेकिन मेडिकल कॉलेज में जितना भी नर्सिंग का स्टाफ काम कर रहा है, वह कर्जे में डूबा है। उसके घर समय से राशन नहीं पहुंच पा रहा है।