—देवालयों के द्वारों पर पड़े ताले, नवरात्रि पर मंदिरों में पसरा सन्नाटा ,अन्य समाचार

द न्यूज यूनिवर्स

झाँसी

25 मार्च

आस्था पर भारी, कोरोना महामारी
—लॉकडाउन की घोषणा के बाद पूजन सामग्री से अधिक भोजन सामग्री खरीदने पर रहा लोगों का जोर
—देवालयों के द्वारों पर पड़े ताले, नवरात्रि पर मंदिरों में पसरा सन्नाटा
झाँसी। अद्भुत नजारा था। देवालयों के द्वार बंद थे। भक्तों की भीड़ नदारद थी। चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिवस पर सजने वाले मंदिरों में सन्नाटा पसरा था। लोगों की आस्था पर कोरोना महामारी का भय भारी पड़ रहा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र द्वारा सम्पूर्ण देश में 21 दिनों के सम्पूर्ण लॉक डाउन की घोषणा के बाद लोग पूजन सामग्री से अधिक भोजन सामग्री खरीदने में व्यस्त रहे। लोगों में रोजमर्रा की आवश्यकताओं की सामग्री की खरीददारी की होड़ मच गई।  लोगों ने चुनरी, नारियल, प्रसाद और अगरबत्ती से ज्यादा आटा, चावल, दाल, सब्जी, दूध आदि की खरीददारी की। हालांकि लोगों ने अपने घरों में ही पूजा-अर्चना की और वैश्विक महामारी कोरोना से विश्व को शीघ्र राहत प्रदान करने की कामना की।

वहीं मन्दिरों की नगरी मऊरानीपुर के तमाम मन्दिरों पर प्रशासन द्वारा ताले डाल कर नोटिस चस्पा करा दिये गए हैं । चैत्र नवरात्रि में मन्दिरों में प्रवेश निषेध किये जाने से हजारों श्रद्धालुओं को काफी परेशानी हो रही है ,प्रतिदिन मन्दिर जाने वालीं महिलाएं व पुरूष मनमसोस कर घरों में बैठे कर मानसिक पूजा अर्चना कर रहे हैं ।
कोरोना वायरस ने जिस तीव्र गति से समूची दुनिया को अपनी चपेट में लिया है उससे बड़ी से बड़ी महाशक्तियों के होश उड़ गए हैं। अमेरिका जैसे देश शक्तिशाली देश में जहाँ के एक नागरिक की मौत पर वह किसी को भी नहीं बख्शता, आज वहां के सैकड़ों लोग असमय ही काल के गाल में समा गए। अनेक आधुनिक सुविधाओं के बावजूद वह कुछ नहीं कर सका। कोरोना वायरस  भारत में भी बड़ी तेजी से पांव पसार रहा है। इसकी दस्तक से सरकार हिल गई है। लोगों को अपने घरों में ही रहने की सलाह दी गई है ताकि कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। कोरोना महामारी से सम्पूर्ण जनजीवन थम गया है। सड़कें सूनी हो गई हैं। वाहनों के पहिए थम गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्र के नाम संबोधन में पूरे में 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा के बाद तो और सख्ती बढ़ गई है। पर लॉकडाउन के पहले दिन ही चैत्र नवरात्रि का प्रारंभ भी हुआ। सनातन संस्कृति में आज से ही हिन्दू नववर्ष प्रारंभ होता है। नवरात्रि में नव दिनों तक नगर के विभिन्न मंदिरों में भव्य आयोजन होते हैं पर इस बार नवरात्रि की रौनक ही गायब है। ब्रह्म मुहूर्त से ही देवी मंदिरों में जलाभिषेक के लिए उमड़ने वाली भक्तों की भीड़ कोरोना वायरस के संक्रमण के भय से अपने-अपने ही देवी की उपासना कर रही है।
संकट की इस घड़ी में लोग तीज-त्योहार को भूलकर अपनी रोजमर्रा की जरूरी सामानों पर ध्यान केंद्रित किए हुए हैं। कोरोना वायरस के चलते 21 दिन के लॉकडाउन के दौरान लोगों को इस बात का भी अंदाजा नहीं है कि कौन-सा सामान मिलेगा और कौन-सा नहीं। हालांकि सरकार द्वारा विभिन्न माध्यमों से लोगों को आश्वस्त किया जा रहा है कि लॉकडाउन के दौरान भी सभी आवश्यक चीजों की आपूर्ति की जाएगी लेकिन लोगों का दिल है कि मानता नहीं। लोग अपने अनुमानों के आधार पर खरीददारी कर रहे हैं। एक-दो महीने की व्यवस्था करने में जुटे हैं। लॉकडाउन की खबर में नवरात्रि भी पीछे छूट गया। लोगों का कहना है कि दुकानों में जितनी बिक्री आटा, चावल, दाल, सब्जी, बिस्किट आदि की हुई उतनी नारियल, चुनरी, प्रसाद और फूल-मालाओं की नहीं हुई। लोग कोरोना वायरस के संक्रमण की भयावहता से परिचित हो गए हैं। अधिकांश लोगों को इस बात का एहसास है कि कोरोना वायरस के खिलाफ जंग बड़ी और चुनौतीपूर्ण है। लापरवाही बरतने पर अंजाम कल्पना से परे हो सकता है। इसलिए सरकार भी लोगों से घरों में रहने की अपील कर रही। हमें समझना होगा जान है तो जहान है।
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पत्रकारिता जगत में गणेश शंकर विद्यार्थी के प्रताप को नहीं भुलाया जा सकता – अरविन्द वशिष्ठ
झाँसी। पत्रकारिता जगत के पुरोधा महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश शंकर विद्यार्थी जी की पुण्यतिथि पर हम उन्हें श्रद्वा सुमन अर्पित करते हैं। उन्होंने अपना जीवन समाज को समर्पित कर दिया। वह किसान आंदोलनकारी और मज़दूरों के नेता, मूकजनों की आवाज़ थे। उनका अखबार प्रताप अपने सिद्वान्तों, मूल्यों के कारण काफी लोकप्रिय था। पत्रकार जगत में गणेश शंकर विद्यार्थी के प्रताप को भुलाया नहीं जा सकता। उनके अखबार में तमाम क्रान्तिकारी नेता भगत सिंह, चन्द्रशेखर आजाद सहित कई क्रान्तिकारी भेष बदलकर रहते थे। वह गांधी जी के अनुयायी थे तो वहीं क्रान्तिकारियों के सबसे विश्वसनीय साथी थे। हम सब उन्हें शत-शत नमन करते हैं।  
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जमाखोरी करने वाले व्यापारियों पर होगी कार्रवाई
झाँसी। न्यूमार्केट स्थित एक होटल में जिला अध्यक्ष अशोक जैन व जिला महामंत्री ई0 मुकेश गुप्ता द्वारा कोरोना वायरस से होने वाली शहर और जिले में बढ़ती समस्याओं को लेकर एक जिला स्तर की बैठक आहूत की। इस बैठक में कोषाध्यक्ष अनिल गुप्ता, उपाध्यक्ष प्रशांत मोहन, महिला मंडल अध्यक्ष श्रीमती कंचन आहुजा, न्यू मार्केट अध्यक्ष संजय अग्रवाल, प्रदेश महिला सगठन मंत्री रजनी गुप्ता सहित अन्य सदस्यों व पदाधिकारियों ने कोरोना वायरस से आई समस्याओं व रोकथाम के लिए सुझाव दिए। बैठक में निर्णय लिया कि व्यापार मंडल ने विशेष अनुरोध किया है कि हमारा कोई भी व्यापारी इस समय जो भारत पर संक्रामक रोग की विपत्ति आई हुई है में किसी भी प्रकार की जमाखोरी ना करें, न ही उचित मूल्य से ज्यादा दामों पर सामग्री को ना भेजें न ही उचित मूल्य से ज्यादा दामों पर सामग्री को ना भेजें, अगर इस तरह की कोई भी शिकायत व्यापार मंडल को मिलती है तो व्यापार मंडल मजबूर होगा उस व्यापारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के लिए बाध्य होगा।
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कोरोना वायरस से न घबराएँ, खुद बचें औरों को बचाएं
चिकित्सकों की सलाह – घबराने नहीं, सावधान रहने की जरूरत
झाँसी। कोरोना के वायरस से लोगों को बचाने और इस मुश्किल दौर से हर किसी को उबारने के लिए सरकार द्वारा हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं । चिकित्सकों द्वारा भी बराबर यही बताया जा रहा है कि कोरोना का कोई मुकम्मल इलाज अभी नहीं है, इसलिए हर किसी को बेहद सावधानी बरतने की जरूरत है । सावधानी बरतकर ही हम कोरोना को मात दे सकते हैं । इस बारे में सभी को जागरूक करने के लिए हर जिले के साथ ही प्रदेश स्तर पर हेल्प डेस्क और हेल्प लाइन की व्यवस्था की गयी है, जिसके जरिये लोगों के सवालों का उचित जवाब मिल रहा है ।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ॰ जी के निगम का कहना है कि कोरोना को लेकर हम तीन महत्त्वपूर्ण बिन्दुओं पर फोकस करने के साथ ही उन्हें क्या सावधानी बरतनी है, उस बारे में जागरूक कर रहे हैं । इसमें पहला है –यदि आप विदेश से लौटे हैं, दूसरा- यदि आप दूसरे राज्य या शहर से गाँव लौटे हैं और तीसरा- यदि आप सामान्य नागरिक हैं तो क्या जरूरी सावधानी बरतनी है ।

यदि विदेश से लौटे हैं :
वैश्विक महामारी कोरोना के दौरान विदेश से आने वालों को बताया जा रहा है कि आप  घबराएं नहीं, 14 दिनों तक घर के एक अलग कमरे में परिवार वालों से दूर रहें । इस तरह से आप अपने साथ परिवार वालों को भी कोरोना से बचा सकते हैं । जिस कमरे में रह रहे हैं उसमें एक लीटर पानी में 15 ग्राम  ब्लीचिंग पाउडर मिलाकर पोछा लागएं । इस दौरान परिवार वालों के साथ ही किसी अन्य से भी हाथ मिलाने और गले मिलने से बचें । विदेश से लौटने के 28 दिनों के भीतर यदि खांसी, बुखार या सांस लेने में तकलीफ जैसे कोई भी लक्षण दिखें तो तत्काल स्वास्थ्य विभाग के टोल फ्री नंबर -1800-180-5145 अथवा अपने जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी/जिला सर्विलांस अधिकारी से संपर्क करें ।

दूसरे राज्य या शहर से गाँव लौटे हैं
इस आपात स्थिति में दूसरे राज्यों और शहरों से लौटने वालों को भी यही सलाह दी जा रही है कि वह 14 दिन तक अपने परिवार के साथ घर पर ही रहें, बाहर न निकलें । धार्मिक स्थल, आयोजन, शादी व सामाजिक समारोह में कतई न जाएँ । बुखार और खांसी होने पर केवल पैरासीटामाल लें और घर पर आराम करें । इमरजेंसी की स्थिति जैसे तेज सांस फूलने या तेज बुखार होने पर स्वास्थ्य विभाग के टोल फ्री नंबर -1800-180-5145 अथवा अपने जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी/जिला सर्विलांस अधिकारी से संपर्क करें ।
सामान्य नागरिक
विदेश यात्रा या दूसरे राज्य से आपके शहर, कस्बे या गाँव में लौटे व्यक्ति को देखकर घबराने की जरूरत नहीं है । ऐसे लोगों को सलाह दें कि वह लौटने के बाद 14 दिनों तक अपने घर में अलग कमरे में रहें और किसी के सम्पर्क में आने से बचें । अगर वह इस सलाह को नहीं मानते हैं तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है । विदेश यात्रा से लौटने के बाद यदि खांसी, बुखार या सांस फूलने जैसे लक्षण दिखाई दें तो ऐसे लोगों के साथ जो लोग निवास करते हैं केवल उनको ही कोरोना की जांच कराने की आवश्यकता है, अन्य लोगों को जाँच कराने की जरूरत नहीं है । भीड़भाड़ वाले स्थलों और आयोजनों में शामिल होने से बचें । आपस में बातचीत करते समय कम से कम दो मीटर की दूरी बनाए रखें ।

कोरोना के बारे में अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें–
चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, उत्तर प्रदेश  – 1800-180-5145 , स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय –011- 23978046, टोल फ्री नंबर- 1075, 0510-2440521 संक्रामक रोग नियंत्रण कक्ष (कार्यालय मुख्य चिकित्सा अधिकारी, झाँसी)
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बच्चों को न भेजे बाहर, घर में दे उनका साथ
सुमन-के तरीक़े से समझाये उन्हे हाथ धोने का लाभ
रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने से खतरा अधिक
प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले पदार्थों का करें सेवन
झाँसी। शुरुआत से ही कहा जा रहा है कि कोरोना का खतरा सबसे अधिक बुजुर्गों और बच्चों को है, क्योंकि उनकी बीमारियों के प्रति रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। ऐसे में उनका खास ख्याल रखा जाना बहुत जरूरी है। एक ओर बुजुर्ग चलने फिरने में असमर्थ होने के कारण व जागरूक होने के चलते बाहर का रुख कम कर रहे है वही बच्चों से इस तरह की अपेक्षा करना थोड़ा मुश्किल है। बच्चों को घर में रुके रहने के लिए परिवार के सदस्यों को उनकी मदद करनी चाहिए।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ॰ जी के निगम ने बताया कि बच्चों को हाथों की स्वच्छता के बारें में जागरूकता पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्हे सुमन के तरीके से बार बार हाथ धुलने के लिए प्रेरित करना चाहिए, अभिभावक उनके साथ मनोरंजन का माहौल बनाए, खेल खेल में उन्हे हाथ धोने के बारें में समझाये। घर पर रहकर उनके साथ ड्राइंग-पेंटिंग, कविता व कहानी पढऩा आदि करे।
बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए उन्हे पोषण युक्त भोजन कराये, उनपर किसी भी तरह का दवाब न बनाए और न ही चिल्लाएँ। घर में इस तरह का माहौल बनाए कि उनका मन घर में लगा रहे।
शुरू करे कहानियों का सिलसिला, डाले पढ़ने की आदत
स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी डॉ. विजयश्री शुक्ला का कहना है कि पहले के समय में जिस तरह घर के बड़े छोटों को कहानी किस्से सुनाया करते थे, अब इस परंपरा को फिर से शुरू करने की आवश्यकता है। जिससे घर के बड़ों और बच्चों दोनों को घर में रहने के लिए प्रोत्साहित कर सकते है। मोबाइल लैपटाप से इतर बच्चों में पढऩे की आदत को बढ़ाने के लिए उनकी मदद करे। उनको आकर्षित करने के लिए रंगीन किताबों का सहयोग ले, व परिवार के सदस्य खुद भी इसमें उनके भागीदार बने। लैपटाप मोबाइल आदि को एल्कोहल आधारित सेनेटाइजर से सेनेटाइज जरूर करे। साथ ही यदि किसी बच्चे या बुजुर्ग को खांसी जुकाम है तो बाकी सदस्यों को इनसे दूर रखे।

क्या है सुमन के फॉर्मूला
कोरोना वायरस से बचाव के लिए सबसे महत्वपूर्ण सुमन के फॉर्मूला के अनुसार हाथों को बार बार धोना है।
एस- सीधा हाथ
यू- उल्टा हाथ
म- मी
ए- अंगूठा
एन- नाखून
के- कलाई
कोरोना वायरस से बचाव के चार प्रमुख संदेश
हाथों को साबुन और पानी से धोते रहे
खाँसते और छीकते समय अपने नाक और मुंह को टिशु या रुमाल से ढके
चेहरे, आँख, नाक, मुंह को बार बार न छुए
ज्यादा भीड़ भाड़ वाली जगह न जाए, खांसी जुखाम वाले मरीजों से तीन फुट की दूरी बनाए रखे
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विपश्यना  सेहत सुधारे व्यक्तित्व निखारे
झाँसी। बुद्ध द्वारा विकसित व खोजी गयी विपस्सना (ध्यान भावना) अद्वितीय है निश्चय से इसके अनेक लाभ हैं जो विधिवत करता है उसपर इसका निश्चय ही सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा ! ऐसा उन लोगों का मानना है जो ऐसे शिविरों मे भाग ले चुके हैं। बुद्धिज्म श्रद्दावान व ज्ञानवान दोनों तरीके के लोगों के लिये अनुकरणीय है  विपश्यना भारत की एक अत्यंत पुरातन साधनाओंमेंसे एक ध्यान प्रणाली विधि है। जिसका अर्थ जो जैसा है, उसे ठीक वैसा ही देखना-समझना है। लगभग 2610 वर्ष पूर्व भारत में यह पद्धति एक सार्वजनीन रोग के सार्वजनीन इलाज, अर्थात् जीवन जीने की कला, के रूप में सिखाया गया।
विपश्यना मन को शांत और निर्मल करने की वैज्ञानिक विधि है। दूसरे शब्दों में इसे मन का व्यायाम भी कहा जा सकता है।  जिस तरह शारीरिक व्यायाम से शरीर को स्वस्थ और मजबूत बनाने की कोशिश की जाती है, वैसे ही विपश्यना से मन को स्वस्थ बनाया जाता है। इसके निरंतर अभ्यास से मन हर स्थिति में संतुलित रहता है, जिससे हम हर परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार रहते हैं।   यह भारत की सबसे प्राचीन मेडिटेशन तकनीक है, जिसे लगभग 2600 साल पहले महात्मा बुद्ध ने फिर से खोजा था। विपश्यना को महात्मा बुद्ध की शिक्षाओं का व्यावहारिक सार भी कहा जाता है, जो धम्म यानी प्रकृति के नियमों को सिखाता है। विपश्यना पाली भाषा के शब्द ‘पस्सनाÓ से बना है, जिसका मतलब होता है देखना। ‘विपस्सनाÓ (विपश्यना) का अर्थ है, जो चीज जैसी है, उसे उसके सही रूप में देखना। जब भी मन में कोई विकार या कहें विचार जागता है तो शरीर पर दो घटनाएं शुरू हो जाती हैं। एक, सांस अपनी नैसर्गिक गति खो देता है। मतलब कि सांस तेज एवं अनियमित हो जाती है। इसके साथ ही शरीर में सूक्ष्म स्तर पर जीव रासायनिक प्रक्रिया शुरू हो जाती है, जिसके परिणामस्वरूप संवेदनाओं का निर्माण होता है। हर विकार शरीर पर किसी न किसी संवेदना का निर्माण करता है। सामान्य व्यक्ति इन विकारों को नहीं देख सकता, लेकिन विपश्यना के प्रशिक्षण एवं प्रयास से सांस एवं शरीर पर होने वाली संवेदनाओं को देख सकता है।
निखर आएगी चेहरे की रंगत
लंबे समय तक इसका अभ्यास शरीर में रक्त संचार को बढ़ाता है, जिसका सीधा असर चेहरे पर नजर आने लगता है। रक्त संचार बढऩे और तनावमुक्त होने से चेहरे की रंगत और निखर आती है।
आत्मविश्वास बढ़ेगा
विपश्यना का अभ्यास मन को हर पल शांत और प्रसन्न रखता है। इससे धैर्य और आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होती है और बेवजह का उतावलापन कम होता है।
बच्चों की एकाग्रता बढ़ाएं
बच्चे स्वभाव से बेहद चंचल होते हैं। उनके लिए अपने मन को शांत रख पढ़ाई करना बेहद मुश्किल होता है। ऐसे बच्चों को अपने मन को एकाग्र करने के लिए विपश्यना का अभ्यास करना चाहिए। विपश्यना आठ से बारह साल के बच्चे कर सकते हैं। इन बच्चों के लिए यह कोर्स एक से दो या तीन दिन का होता है।
विपश्यना की मुद्रा
विपश्यना के लिए घर के सबसे शांत कोने का इस्तेमाल करें। कमरे की लाइट बंद करके आसन पर पालथी मार कर बैठ जाएं। बैठने के दौरान हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि आपकी कमर और गर्दन सीधी और आंखें बंद हों। इसके बाद नाक से आने और जाने वाली सांस पर ध्यान केंद्रित करें। कुछ दिनों तक इसी का अभ्यास करते रहें। इसके बाद सांसों पर ध्यान केंद्रित रखते हुए शरीर में होने वाली संवेदनाओं की अनुभूति करें, यही विपश्यना है। शुरू में इसे कुछ समय तक सुबह-शाम करें, बाद में सुविधा के मुताबिक समय बढ़ा भी सकते।
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कोरोना वायरस के संक्रमण से निपटने को टास्क फोर्स का गठन
झाँसी। आईएमए अध्यक्ष डा. ज्ञानेन्द्र कुमार व सचिव डा. प्रिंस अग्रवाल ने आज आईएमए के पदाधिकारियों के साथ दूरभाष पर वार्ता कर देश में छाए कोरोना वायरस के संक्रमण से निपटने के लिये एक टास्क फोर्स कमेटी का गठन किया। कमेटी के अध्यक्ष डा. ज्ञानेन्द्र कुमार, संयोजक डा. बीके गुप्ता को बनाया। समिति अन्य सदस्य डा. प्रिंस अग्रवाल, डा. संजीव कुमार, डा. विजय भारद्वाज, डा. विनोद साहू, डा. प्रमोद गुप्ता, डा. अनीश जैन, डा. हरेन्द्र यादव, डा. राजकुमार राजपूत, डा.रविकांत, डा. अनु निगम, डा. पंकज सोनकिया है। टास्क फोर्स जनता की आवश्यकता के अनुसार उनकी मदद करेगी । टास्क फोर्स ने बताया कोरोना बीमारी महामारी का रूप ले चुकी है हमें इससे बचने के लिये सावधानियां लेनी होगी। शासन द्वारा दिशा निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जाये।जनता को सलाह देने के लिये चिकित्सकों की टीम गठित की गयी है। जनता  निम्न फोन नम्बर डा. ज्ञानेन्द्र कुमार-  7390904444, डॉ रमेश चंद्रा-9450071353, डॉ ए के सांवल-9415057201, डॉ धीरज प्रकाश-9415030806, डॉ प्रिंस अग्रवाल-9415031093, डॉ अनु गिनम-9415179716 पर सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक सलाह ले सकेगी।
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लॉकडाउन के संबंध में जनता को करें जागरुक: आईजी
झाँसी। पुलिस महानिरीक्षक सुभाष चंद्र बघेल ने चौकी प्रभारी व बीट आरक्षियों को अपने अपने क्षेत्र में जाकर लॉकडाउन के संबंध में जनता को जागरुक करने व कोरोना वायरस से संबंधित कोई संदिग्ध मिलता है तो तत्काल सूचना दे।
पुलिस महानिरीक्षक झाँसी परिक्षेत्र सुभाष चंद्र बघेल ने निर्देश जारी किया है। निर्देशों में कहा है कि समस्त प्रभारी निरीक्षक/थानाध्यक्ष अपने अपने चौकी प्रभारी/बीट आरक्षीगण को निर्देशित कर दें कि वह अपने अपने थाना क्षेत्र में रहने वाले डिजिटल वालेंटियर्स से वार्ता कर लें और उन्हें लॉक-डाउन के सम्बन्ध में जागरूक करें। किसी प्रकार की अफवाह आदि के सम्बन्ध में तत्काल पुलिस को सूचित करें और कोरोना वायरस से संबंधित कोई संदिग्ध है तो उसकी सूचना स्थानीय पुलिस, यूपी-112, सीएमओ  हेल्पलाइन 0510-2440521 पर दें।
निर्देशों में कहा है कि अपने थाना क्षेत्रों के समस्त गॉव एवं मोहल्लों में जाकर लोगों को लॉक-डाउन के सम्बन्ध में जागरूक करें। थाना प्रभारी स्वयं अपने थाना थानाक्षेत्र के डिजिटल वालेंटियर के सदस्यों से वार्ता करें, साथ ही अपने अधीनस्थों से शत प्रतिशत अनुपालन(वार्ता) कराना सुनिश्चित करें। पुलिस महानिरीक्षक झाँसी परिक्षेत्र झाँसी के कार्यालय से क्रॉस चेक किया जाएगा। वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा भी औचक चेकिंग की जा सकती है। अनुपालन न करने पर संबंधित के विरुद्ध कार्यवाही अमल में लायी जाएगी।
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