असीराने कर्बला को खिराजे अकीदत पेश की

द न्यूज़ यूनिवर्स

झाँसी

7 अक्टूबर


ज़ुल्म के ख़िलाफ जितनी देर से उठोगे, उतनी ही ज़्यादा क़ुर्बानियां देनी पड़ेंगी 
झाँसी। असीराने करबला को ख़िराजे अक़ीदत पेश। अलमे मुबारक और इमाम हुसेन की बहने बीबी ज़ैनबो कुलसूम और बेटी बीबी सकीना की अमारियों की शबीह की ज़ियारत।
सन 1996 से हर  साल से लगातार चौबीसवें साल में भी आज दोपहर दो बजे एक मजलिस ए अज़ा इमाम बारगाह तमन्ना  ए हज़रात अब्बास, अली गंज, प्रेम नगर, झाँसी में हुई। जिसकी  इब्तेदा  क़ुरआन  ख़्वानी से मौलाना शाने हैदर ज़ैदी साहब ने की। मर्सिया  ख़्वानी- सर्व श्री अदीब हैदर, मोहम्मद  हादी , आरज़ू  हैदर ने की और मर्सिया,’ मजलिसों में आज शह का तज़किरा ज़ैनब से है, ये हदीसे करबला, फर्शे अज़ा ज़ैनब से है। पढ़ा और अज़ादारों से ख़िराजे तहसीन हासिल किया। इसके बाद लोकप्रिय समाज सेवी व वक्ता जनाब सैयद फ़रमान ज़ैदी (चांद भाई ) ने सलाम, आओ झुक कर सलाम करें उन्हें, जिनके हिस्से में यह मुक़ाम आता है।” इनके साथ तौहीद  अब्बास , सैफ़ी व कई  शायरे एहलेबैत ने ख़ूबसूरत अंदाज़  में नज़राने  अक़ीदत  पेश किया। अपनी पुरजोश ख़िताबत में – अकबरपुर से तशरीफ़ लाये आली जनाब मौलाना शारिक साहब ने कहा,करबला के शहीदों का ग़म मनाने का मतलब है, आज की ज़ख़्मी और सिसकती इंसानियत से इज़हारे हमदर्दी और इंसानियत की हिफाज़त का अहद।

इस अवसर पर सैयद शहनशाह हैदर आब्दी ने इमाम हुसेन की हदीस, ज़ुल्म के ख़िलाफ जितनी देर से उठोगे, उतनी ही ज़्यादा क़ुर्बानियां देनी पड़ेंगी। पढ़कर अज़ादारों को आगाह किया। मसायबी तक़रीर मौलाना इक़्तेदार  हुसैन साहब ने की। इसके बाद अलमे मुबारक की शबीह और बीबी ज़ैनब, बीबी कुलसूम, बीबी शहर बानो, बीबी उम्मे लैला, बीबी सकीना वगैरह की अमारियों की शबीह की ज़ियारत कराई गई। मातमी जुलूस निकला। नौहा ओ मातम हुआ। नौहा ख़्वानी-  शाहबाज़ रिज़वी , हाशिम  रज़ा, साहिबे  आलम व शानू  ने की । सभी अज़ादारों के लिये बाद मजलिसे अज़ा दस्तरख़्वान का इंतज़ाम भी किया गया। आख़िर में मुल्क और समाज के साथ सभी की सेहत, हर जगह कामयाबी और तरक़्क़ी की दुआ की गई। अज़ादारों ने आमीन कहा। इस अवसर  पर इन्केसार  हुसैन , मौलाना फ़रमान आब्दी , शमी  हैदर , नक़ी हैदर, महताब  हैदर , आदिल हुसैन , मोहम्मद हैदर, अमन  हैदर, सरकार हैदर, इं. काज़िम रज़ा,  नदीम हैदर, अज़ीम हैदर, नज़र हैदर फाईक़, असहाबे पंजतन, नाज़िम जाफर, नक़ी हैदर, जावेद अली, क़मर हैदर, ज़ामिन अब्बास, ज़ाहिद हुसैन” “इंतज़ार”,अख़्तर हुसैन, नईमुद्दीन, मुख़्तार अली, के साथ हज़ारों की संख्या में इमाम हुसैन के अन्य धर्मावलम्बी अज़ादार और शिया मुस्लिम महिलाऐं बच्चे और पुरुष काले लिबास में उपस्थित रहे। “अलविदा अलविदा, ऐ हुसैन अलविदा की गमगीन सदाओं के साथ मातमी जुलुस का समापन हो गया। आभार संयोजक सैयद शाहबाज़ रिज़वी ने किया।